ਯੋਗ
योग भगाए रोग
बरसात में भीगना और बीमार होना आम बात है, ऎसे में इन दिनों योगासनों के जरिए रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा कर अधिक स्वस्थ रहा जा सकता है।
मानसून में बारिश की गिरती बूंदे अमृत के समान लगती हैं, लेकिन इन दिनों हमारी थोड़ी-सी लापरवाही कई बीमारियों का सबब बन जाती है। इन दिनों संक्रमण के कारण पेट दर्द, सर्दी, अस्थमा, त्वचा रोग, जोड़ो में दर्द आदि बीमारियों का खतरा बना रहता है। ऎसे में योग के जरिए शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर इन बीमारियों से बचा जा सकता है।
हस्त उत्तानासन
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ਕਮਰ ਨੂੰ ਚਮਕਦਾਰ ਬਣਾਉ
ਜੇ ਤੁਹਾਡੀ ਕਮਰ ਅਤੇ ਪੇਟ ਲਚਕਦਾਰ ਅਤੇ ਸੰਤੁਲਿਤ ਹਨ, ਤਾਂ andਰਜਾ ਅਤੇ ਉਤਸ਼ਾਹ ਰਹੇਗਾ, ਅਤੇ ਨਾਲ ਹੀ ਤੁਸੀਂ ਕਈ ਕਿਸਮਾਂ ਦੀਆਂ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਤੋਂ ਬਚਾਅ ਹੋਵੋਗੇ. ਅਨਿਯਮਿਤ ਅਤੇ ਜ਼ਿਆਦਾ ਖਾਣ ਪੀਣ ਕਾਰਨ, ਕਮਰ ਦਾ ਕਮਰਾ ਬਣਾਉਣ ਵਿਚ ਜ਼ਿਆਦਾ ਦੇਰ ਨਹੀਂ ਲਗਦੀ. ਕਮਰ ਦੇ ਪਤਲੇ ਹੋਣ ਕਾਰਨ, ਵਿਅਕਤੀ ਤੰਦਰੁਸਤ ਦਿਖਾਈ ਦਿੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਹੀ ਇਹ ਤੰਦਰੁਸਤ ਵੀ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ. ਆਪਣੀ ਕਮਰ ਪਤਲੇ ਰੱਖਣ ਲਈ ਕੁਝ ਯੋਗਾ ਸੁਝਾਅ ਇਹ ਹਨ.
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कमर को बनाये लचकदार
यदि आपकी कमर और पेट लचकदार तथा संतुलित हैं तो स्फूर्ति और जोश तो कायम रहेगा ही साथ ही आप कई तरह के रोग से बच जाएंगे। अनियमित और अत्यधिक खान-पान के कारण कमर के कमरा बनने में देर नहीं लगती। कमर के छरहरा होने से व्यक्ति फिट नजर तो आता ही है साथ ही उसमें फूर्ति भी बनी रहती है। कमर को छरहरा बनाए रखने के लिए यहाँ प्रस्तुत है कुछ योगा टिप्स।
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दुनिया भर में आज 'योग' का 'महायोग'
भारत समेत विश्व के 192 देश रविवार को पहला अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाएंगे। राजधानी दिल्ली भी योग दिवस के लिए तैयार है। इस अवसर पर आयुष मंत्रालय द्वारा आयोजित 35 मिनट का कार्यक्रम सुबह साढ़े छह बजे शुरू होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी राजपथ पर होने वाले भव्य कार्यक्रम में शिरकत करेंगे। अनुमान है कि 37 हजार लोग राजपथ पर आकर योगाभ्यास करेंगे। सरकार को उम्मीद है कि एक ही जगह पर सबसे ज्यादा लोगों द्वारा योग करने का रिकॉर्ड बन जाएगा, जिसे गिनीजवर्ल्ड रिकॉर्ड्स में जगह मिलेगी।
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घुटनों के लिए जानू नमन आसन
ढलती उम्र में व्यक्ति को जोड़ों से संबंधित रोग होने लगते हैं। अंग-अंग दुखता है। ज्यादा दूर चला नहीं जाता या बहुत ऊपर चढ़ा नहीं। व्यक्ति तभी तक जवान रहता है, जब तक उसके सभी अंग और जोड़ तनावरहित रहते हैं। जो लोग जानू नमन आसन करते रहते हैं उनको यह समस्या कभी नहीं सताती।
जानू घुटने को कहते हैं। क्रम से घुटनों को मोड़ने और सीधा करने को जानू नमन कहते हैं। जानू नमन आसन में अंग संचालन (सूक्ष्म व्यायाम) के अंतर्गत आता है।
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गर्भाशय की समस्या को दूर करे पश्चिमोत्तानासन
पश्चिम अर्थात पीछे का भाग- पीठ। पीठ में खिंचाव उत्पन्न होता है, इसीलिए इसे पश्चिमोत्तनासन कहते हैं। इस आसन से शरीर की सभी माँसपेशियों पर खिंचाव पड़ता है। पशिच्मोत्तासन आसन को आवश्यक आसनों में से एक माना गया है। शीर्षासन के बाद इसी आसन का महत्वपूर्ण स्थान है। इस आसन से मेरूदंड लचीला बनता है, जिससे कुण्डलिनी जागरण में लाभ होता है। यह आसन आध्यात्मिक दृष्टि से अधिक महत्वपूर्ण है। पशिच्मोत्तासन के द्वारा मेरूदंड लचीला व मजबूत बनता है जिससे बुढ़ापे में भी व्यक्ति तनकर चलता है और उसकी रीढ़ की हड्डी झुकती नहीं है। यह मेरूदंड के सभी विकार जैसे- पीठदर्द, पेट के रोग, यकृत रोग, तिल्ली, आंतों के रोग तथा ग
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छाछ या मट्ठा के औषधीय उपयोग
छ या मट्ठा से सभी परिचित हैं ।यह स्वादिष्ट एवं पाचक् होता है। अच्छी तरह जमाए दही मैं एक चौथाई जल मिलाकर मथानी से मथकर मक्खन प्रथक कर देने से छाछ या मट्ठा प्राप्त होता है । यह स्वयं तो शीघ्र पचता है अन्य
द्रव्यो को भी पचाने मैं समर्थ होता है इसी कारण इसका अनुपान
पथ्य् एवं औषधि तीनों रूप मैं होता है।
पेट दर्द की अवस्था मैं जब हाथ पैरों मैं सूजन कब्ज , सूखी खासी पेट मैं गुड़ गुड़ की आवाज आदि सहायक लक्षण हो तब छाछ मैं पीपल व सेन्धा नमक मिलाकर पीने से पेट दर्द ठीक होता है ।
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कर्मयोग का वास्तविक अर्थ क्या है?
समतापूर्वक कर्म ही कर्मयोग है
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ਬਹੁਤ ਸਾਰੀਆਂ ਸਮੱਸਿਆਵਾਂ ਦਾ ਹੱਲ: ਕਪਲਭਤੀ
ਕਪਲਭਤੀ ਪ੍ਰਾਣਾਯਾਮ ਦਾ ਅਭਿਆਸ ਨਹੀਂ ਬਲਕਿ ਹੇਤਕਰਮਾ ਹੈ. ਇਸ ਦੇ ਲਈ, ਪਲਥੀ ਨਾਲ ਸਿੱਧੇ ਬੈਠੋ, ਅੱਖਾਂ ਬੰਦ ਕਰੋ ਅਤੇ ਬੁੱਧ ਦੀ ਆਸ ਵਿਚ ਹੱਥ ਰੱਖੋ. ਸਾਹ ਤੇ ਸਿਮਰਨ ਲਿਆਓ ਅਤੇ ਸਾਹ ਦੀ ਗਤੀ ਦਾ ਅਨੁਭਵ ਕਰੋ ਅਤੇ ਹੁਣ ਇਸ ਕਿਰਿਆ ਨੂੰ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ. ਇਸਦੇ ਲਈ, ਹੇਠਲੇ ਪੇਟ ਨੂੰ ਅੰਦਰ ਵੱਲ ਖਿੱਚੋ ਅਤੇ ਜ਼ੋਰ ਨਾਲ ਸਾਹ ਨੱਕ ਦੇ ਬਾਹਰ ਸੁੱਟੋ. ਇਹ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਬਾਰ-ਬਾਰ ਕਰਦੇ ਰਹੋ ਜਦੋਂ ਤਕ ਤੁਸੀਂ ਥੱਕੇ ਮਹਿਸੂਸ ਨਾ ਕਰੋ. ਫਿਰ ਪੂਰੇ ਸਾਹ ਨੂੰ ਬਾਹਰ ਕੱ .ੋ ਅਤੇ ਸਾਹ ਸਾਧਾਰਣ ਕਰੋ ਅਤੇ ਆਰਾਮ ਨਾਲ ਬੈਠੋ.
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कई समस्याओं का एक हल: कपालभाति
कपालभाति प्राणायाम नहीं बल्कि षट्कर्म का अभ्यास है। इसके लिए पालथी लगाकर सीधे बैठें, आंखें बंदकर हाथों को ज्ञान मुद्रा में रख लें। ध्यान को सांस पर लाकर सांस की गति को अनुभव करें और अब इस क्रिया को शुरू करें। इसके लिए पेट के निचले हिस्से को अंदर की ओर खींचे व नाक से सांस को बल के साथ बाहर फेंके। यह प्रक्रिया बार-बार इसी प्रकार तब तक करते जाएं जब तक थकान न लगे। फिर पूरी सांस बाहर निकाल दें और सांस को सामान्य करके आराम से बैठ जाएं।
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