Skip to main content

স্থায়ী যোগ ভঙ্গি

શીર્ષાસન

શીર્ષાસનને આસનોનો રાજા કહેવામાં આવે છે. માથાના બળે કરવામાં આવતુ હોવાથી આ આસનને શીર્ષાસન કહેવામાં આવે છે. આપણા શરીરના બધા જ તંત્રોની તંદુરસ્તી જાળવવા જો એક આસનનું નામ લેવાનું હોય તો શીર્ષાસનનું લઈ શકાય. ખાસ કરીને નાડીતંત્રને ચેતનવંતી બનાવવા તથા શારીરિક અને માનસિક તનાવમાંથી મુક્તિ મેળવવા માટે શીર્ષાસન અજોડ છે. શીર્ષાસન માનવો માટે અમૃત સમાન છે. જરા અને વ્યાધિને પણ દૂર કરે અને શરીરને સર્વાંગે નિરોગી બનાવે તેવું સર્વશ્રેષ્ઠ રસાયણ છે

शीर्षासन

सिर के बल किए जाने की वजह से इसे शीर्षासन कहते हैं। शीर्षासन एक ऐसा आसन है जिसके अभ्यास से हम सदैव कई बड़ी-बड़ी बीमारियों से दूर रहते हैं। हालांकि यह आसन काफी मुश्किल है। यह हर व्यक्ति के लिए सहज नहीं है। शीर्षासन से हमारा पाचनतंत्र अच्छा रहता है, रक्त संचार सुचारू रहता है। शरीर को बल प्राप्त होता है।

कटिचक्रासन

कटिचक्रासन क्या है इसके लिए आपको इस शब्द को तोड़कर देखना होगा।  कटिचक्रासन दो शब्द मिलकर बना है -कटि जिसका अर्थ होता है कमर और चक्र जिसका अर्थ होता है पहिया। इस आसन में कमर को दाईं और बाईं ओर मरोड़ना अर्थात् घुमाना होता है। ऐसा करते समय कमर पहिये की तरह घूमती है, इसलिए इसका नाम कटिचक्र रखा गया है।

कटिचक्रासन की विधि

अब बात आती है कि कटिचक्रासन को कैसे किया जाए ? इस आसन से आप अधिक लाभ तभी ले सकते हैं जब इसको टेक्निकली सही तरीके से करते हैं।

तरीका

বসিষ্ঠাসন

আক্ষরিক অর্থ "সবচেয়ে দুর্দান্ত, সেরা, ধনী" হ'ল বশিষ্ঠ যোগ traditionতিহ্যের অনেক বিখ্যাত সাধুদের নাম। ভারতের অন্যতম সম্মানিত সাধক হিসাবে বিবেচিত হয়। Vasষি বসিষ্ঠ হলেন সপ্তরশি মণ্ডলের ageষি। তিনি vedগ্বেদ মণ্ডলের সর্বাধিক বিশিষ্ট এবং প্রধান লেখক। Vasষি বসিষ্ঠের কামধেনু নামে একটি গরু ছিল। গরুটির নন্দিনী নামে একটি বাছুর ছিল। এই গরুটির divineশিক শক্তি ছিল এবং সে Vasষি ভাসিষ্ঠকে খুব ধনী করেছিল। অতএব বশিষ্ঠের আসল অর্থ সমৃদ্ধ।

এই আসন উপরের দেহকে (বুক, পেট এবং কাঁধ) শক্তিশালী করে এবং এতে স্থিতিশীলতা নিয়ে আসে।

বসিষ্ঠাসন সম্পাদনের পদ্ধতি: -

वसिष्ठासन

- का शाब्दिक अर्थ है “सबसे उत्कृष्ट, सर्वश्रेष्ठ, सबसे धनी” वशिष्ठ योग परंपरा में कई प्रसिद्ध संतों का नाम है। को भारतवर्ष के सबसे सम्मानीय संतो में से माना जाता है। ऋषि वशिष्ठ सप्तऋषि मंडल के एक ऋषि है। वे ऋग्वेद मंडल के सबसे प्रधान व मुख्य लेखक भी है। ऋषि वशिष्ठ के पास एक गाय थी जिसका नाम कामधेनु था। उस गाय का एक बछड़ा था जिसका नाम नन्दिनी था। उस गाय के पास दैविक शक्तियां थी और उसने ऋषि वशिष्ठ को बहुत धनवान बना दिया था। इसलिए वशिष्ठ का वास्तवित अर्थ धनवान है।