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योग

योग मुद्रा क्या है

विधि- सर्वप्रथम पद्मासन में आइए । हाथों को पीछे ले जाइए बायें हाथ से दायें हाथ की कलाई को पकड़ लीजिए  पहले साँस लीजिए और साँस को निकालते हुए नीचे फर्श पर माथा लगाइए ,फिर साँस लेते हुए वापिस आइए
4-5 बार साँस के साथ दोहरायें

श्वेत प्रदर(ल्यूकोरिया) में योग

ल्यूकोरिया (श्वेत प्रदर) की बीमारी महिलाओं की आम समस्या है। संकोच में इसे न बताना कई गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है। थोड़ी सी सावधानी व उपचार के जरिए इसके घातक परिणामों से बचा जा सकता है। अन्यथा यह कैंसर का कारण बन सकती है। सामान्य तौर पर गर्भाशय में सूजन अथवा गर्भाशय के मुख में छाले होने से यह समस्या पैदा होती है। उपचार न कराने से पीडि़ता को कई तरह की मानसिक व शारीरिक समस्याओं का शिकार होना पड़ता है। इसलिए महिलाएं को श्वेत प्रदर की बीमारी को हल्के में नहीं लेना चाहिए।

ये 10 योगासन करने से दूर होती है थायरायड की बीमारी

थायरॉइड मानव शरीर का एक प्रमुख एंडोक्राइन ग्लैंड यानी अंत:स्रावी ग्रंथि है। यह गर्दन के निचले हिस्से में होती है। छोटी-सी यह ग्रंथि शरीर में हार्मोन का निर्माण करती है और मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित रखती है। थायरॉइड ग्रंथि के सही तरीके से काम करने से आशय है कि शरीर  का मेटाबॉलिज्म यानी भोजन को ऊर्जा में बदलने की प्रक्रिया भी सुचारू रूप से काम कर रही है। पर जैसे ही यह ग्रंथि घटनी और बढ़नी शुरू होती है तो मानव जीवन के लिए परेशानियां शुरू हो जाती हैं। इस ग्रंथि का असर हृदय, मांसपेशियों, हड्डियों और कोलेस्ट्रॉल के स्तर पर भी पड़ता है।

यौगिक ध्यान से लाभ

महर्षि पतंजलि के योगसूत्र में ध्यान भी एक सोपान है।
चित्त को एकाग्र करके किसी एक वस्तु पर केन्द्रित कर देना ध्यान कहलाता है। प्राचीन काल में ऋषि मुनि भगवान का ध्यान करते थे। ध्यान की अवस्था में ध्यान करने वाला अपने आसपास के वातावरण को तथा स्वयं को भी भूल जाता है। ध्यान करने से आत्मिक तथा मानसिक शक्तियों का विकास होता है। जिस वस्तु को चित मे बांधा जाता है उस मे इस प्रकार से लगा दें कि बाह्य प्रभाव होने पर भी वह वहाँ से अन्यत्र न हट सके, उसे ध्यान कहते है।
ध्यान से लाभ
ऐसा पाया गया है कि ध्यान से बहुत से मेडिकल एवं मनोवैज्ञानिक लाभ होते हैं।

योग से समृद्ध होता जीवन

योग का ही परिणाम है पूरी सृष्टि। गणित के योग की तरह ही यह हमारे गुणों की अभिवृद्धि करता है। हमारे भीतर की चेतना को जगाकर हमें संस्कारवान और हृष्ट-पुष्ट बनाता है। योग के महत्व पर डॉ. प्रणव पण्ड्या का आलेख... बाहरी धन-संपदा से ज्यादा महत्वपूर्ण है भीतर कीसंपदा। अंतस के धनी बनकर ही हम सही मायने में

सफल कहलाएंगे...

 

योगासन दिलाए पीरियड्स के दर्द में आराम

कई महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान शरीर, खासतौर कमर में काफी दर्द होता है। इस दर्द को दूर करने के लिये आप योगासनों का सहारा ले सकती हैं। योग के पास हर बीमारी का इलाज है इसलिये इन्‍हें एक बार जरुर आजमाइये। नियमित तौर पर इन आसनों को करने से आपकी कमर और अन्‍य हिस्‍से मजबूत बनेंगे। आसन करने से शरीर के हर हिस्‍से स्‍ट्रेच होते हैं तथा खून का संचार अच्‍छी प्रकार से होने लगता है, जिससे शरीर की थकान, पेट की सूजन, गैस और दर्द आदि दूर होते हैं। आइये जानते हैं कि कौन-कौन से हैं वे योगासन जिन्‍हें करने से मासिकधर्म का दर्द दूर हो सकता है।

योग के आसन दूर कर सकते हैं डिप्रेशन

अक्सर किसी को खोने या जीवन में छोटी-बड़ी घटनाएं घटने से हम डिप्रेशन के शिकार हो जाते हैं। कई बार हम लंबे समय तक इसे नजरंदाज करते रहते हैं। इस तरह ना तो हम प्रफेशनली अपना बेस्ट दे पाते हैं और न ही निजी जिंदगी में खुश रह पाते हैं। ऐसा माना गया है कि डिप्रेशन का इलाज योग में भी है। आइए जानें कि किस तरह दिनचर्या से कुछ वक्त निकालकर योग के जरिए हम डिप्रेशन को खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं- 

बुजुर्गों के लिए योगासन- बद्धकोणासन

बुजुर्गों के लिए योगासन में यह आसन उनकी बॉवेल मूवमेंट को सुधारता है और पाचन क्रिया मजबूत करता है। इसके अलावा, इस आसन से जांघ, घुटने की मसल्स स्ट्रेच होती हैं और जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है। इसे करने के लिए कमर को सीधा रखते हुए जमीन पर बैठ जाएं और पैरों को सामने की तरफ फैला लें। अब दोनों घुटनों को मोड़ते हुए उनके तलवे अपने जननांग की तरफ लाएं। अब दोनों पैर के तलवों को एक साथ मिला लें और जितना हो सके जननांगों के पास ले जाएं। अब अपनी जांघों और घुटनों को जमीन पर टिका लें और हाथों से तलवों को पकड़ लें। अब लंबी और गहरी सांस लें और अपनी जांघों को तितली के पंखों की तरह तेज-तेज ऊपर नीचे करें। जब

बुजुर्गों के लिए योगासन- शलभासन

यह योगासन बुजुर्गों की गर्दन और कमर की मसल्स को मजबूत फ्लैक्सिबल बनाता है और उनकी पाचन क्रिया सुधारता है। इस योगासन को करने के लिए पेट के बल जमीन पर लेट जाएं। अब सांस अंदर लेते हुए अपना दायां पैर उठाएं और पैर को सीधा रखें। अब इसी अवस्था में रहें और सांस लेते रहें। सांस छोड़ते हुए दाएं पैर को नीचे रखें। अब अपने बाएं पैर से भी यही प्रक्रिया दोहराएं। इसके बाद सांस अंदर लेते हुए और घुटनों को सीधा रखते हुए कुछ गति के साथ दोनों पैरों को जितना हो सके ऊपर ले जाएं और इसी अवस्था में बने रहने की कोशिश करें। इसके बाद सांस छोड़ें और दोनों पैरों को आराम से नीचे लाएं।

सर्वाइकल के लिए योग : भुजंगासन

भुजंग सांप को कहा जाता है। इसलिए, इस आसन को इंग्लिश में कोबरा आसन भी कहा जाता है। इस आसन को रोजाना करने से कंधे, हाथ, कोहनियां, पीठ आदि की अकड़न दूर होती है और यह सब मजबूत होते हैं। सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस के लिए यह बेहतरीन उपाय है।