योग
क्या योग और ध्यान से सबकुछ संभव है?
एक बार हम ध्यान शिविर में बैठ के चर्चा कर रहे थे।
सामने बर्फ से ढके हिमालय की खूबसूरती और ताजी मनमोहक हवा हमारे मन को आनंदित कर रही थी।
पंचकेदार के पास एक बहुत ही खूबसूरत जगह है जहाँ हमारे गुरुजी ऐसे ध्यान शिविर कराते रहते हैं।
उस दिन गुरुजी किसी काम से बाहर थे और सबको ध्यान कराने की जिम्मेदारी मेरे ऊपर थी।
दिल्ली के एक बड़े व्यापारी हम सबके साथ बैठ कर ध्यान सीख रहे थे।
उन्होंने मुझसे पूछा : क्या ध्यान योग से कोई भी शक्ति प्राप्त की जा सकती है? और कुछ भी किया जा सकता है?
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क्या है क्रिया योग ?
संस्कृत के शब्द 'क्रिया' का मतलब 'करना' है। इसलिये क्रिया योग का मतलब है कि वे प्रणालियां जिनके द्वारा सेहद, आध्यात्मिक विकास, या एकता-चेतना का अनुभव हो। पतांजली के २००० साल पुराने 'योग सूत्र' में लिखा है कि क्रिया योग का मतलब है कि मन और इन्द्रियों को वश मे रखना, स्वयं विल्क्षेषण, स्वाध्याय, ध्यान का अभ्यास, और अहंकार की भावना का ईशवर प्राप्ति के लिये त्याग।
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योग भगाए रोग
बरसात में भीगना और बीमार होना आम बात है, ऎसे में इन दिनों योगासनों के जरिए रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा कर अधिक स्वस्थ रहा जा सकता है।
मानसून में बारिश की गिरती बूंदे अमृत के समान लगती हैं, लेकिन इन दिनों हमारी थोड़ी-सी लापरवाही कई बीमारियों का सबब बन जाती है। इन दिनों संक्रमण के कारण पेट दर्द, सर्दी, अस्थमा, त्वचा रोग, जोड़ो में दर्द आदि बीमारियों का खतरा बना रहता है। ऎसे में योग के जरिए शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर इन बीमारियों से बचा जा सकता है।
हस्त उत्तानासन
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दुनिया भर में आज 'योग' का 'महायोग'
भारत समेत विश्व के 192 देश रविवार को पहला अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाएंगे। राजधानी दिल्ली भी योग दिवस के लिए तैयार है। इस अवसर पर आयुष मंत्रालय द्वारा आयोजित 35 मिनट का कार्यक्रम सुबह साढ़े छह बजे शुरू होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी राजपथ पर होने वाले भव्य कार्यक्रम में शिरकत करेंगे। अनुमान है कि 37 हजार लोग राजपथ पर आकर योगाभ्यास करेंगे। सरकार को उम्मीद है कि एक ही जगह पर सबसे ज्यादा लोगों द्वारा योग करने का रिकॉर्ड बन जाएगा, जिसे गिनीजवर्ल्ड रिकॉर्ड्स में जगह मिलेगी।
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छाछ या मट्ठा के औषधीय उपयोग
छ या मट्ठा से सभी परिचित हैं ।यह स्वादिष्ट एवं पाचक् होता है। अच्छी तरह जमाए दही मैं एक चौथाई जल मिलाकर मथानी से मथकर मक्खन प्रथक कर देने से छाछ या मट्ठा प्राप्त होता है । यह स्वयं तो शीघ्र पचता है अन्य
द्रव्यो को भी पचाने मैं समर्थ होता है इसी कारण इसका अनुपान
पथ्य् एवं औषधि तीनों रूप मैं होता है।
पेट दर्द की अवस्था मैं जब हाथ पैरों मैं सूजन कब्ज , सूखी खासी पेट मैं गुड़ गुड़ की आवाज आदि सहायक लक्षण हो तब छाछ मैं पीपल व सेन्धा नमक मिलाकर पीने से पेट दर्द ठीक होता है ।
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कर्मयोग का वास्तविक अर्थ क्या है?
समतापूर्वक कर्म ही कर्मयोग है
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हठयोग क्या है?
हठयोग शारीरिक और मानसिक विकास के लिए विश्व की प्राचीनतम प्रणाली है जिसका शताब्दियों से भारत के योगियों द्वारा अभ्यास किया गया है। मनोकायिक व्यायामों की यह एक अनन्यतम विधि है। हठयोग के आसन मानसिक प्रशांति, शारीरिक संतुलन और दिव्य प्रभाव के साथ प्रतिपादित होते हैं। इससे मेरुदंड लचीला बनता तथा स्नायु संस्थान के स्वास्थ्य में वृद्धि होती है। योगासनों से स्नायओं के मूल का आंतरिक प्राणों द्वारा पोषण होता है। अतएव योगासन अन्य व्यायामों से पृथक है।
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ਅਸ਼ਟੰਗ ਯੋਗ ਕੀ ਹੈ?
ਅਸ਼ਟੰਗ ਯੋਗਾ ਮਹਾਂਰਿਸ਼ੀ ਪਤੰਜਲੀ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ, ਚਿਤਾਵ੍ਰਿਤੀ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਦਾ ਨਾਮ ਯੋਗਾ (ਯੋਗਸੰਤਵਰਤੀ) ਹੈ. ਇਸਦੀ ਸਥਿਤੀ ਅਤੇ ਪ੍ਰਾਪਤੀ ਲਈ ਕੁਝ ਉਪਾਅ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹਨ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ 'ਅੰਗਸ' ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਗਿਣਤੀ ਵਿਚ ਅੱਠ ਮੰਨਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ.
ਅਸ਼ਟੰਗ ਯੋਗ ਦੇ ਤਹਿਤ ਪਹਿਲੇ ਪੰਜ ਅੰਗ (ਯਾਮ, ਨਿਯਮ, ਆਸਣ, ਪ੍ਰਾਣਾਯਾਮ ਅਤੇ ਪ੍ਰਤਿਹਾਰਾ)।
ਯਾਮਾ,
ਨਿਯਮ,
ਆਸਣ,
ਪ੍ਰਾਣਾਯਾਮ ਅਤੇ
ਕdraਵਾਉਣਾ
'ਬਾਹਰ' ਅਤੇ
ਬਾਕੀ ਤਿੰਨ ਅੰਗ (ਧਾਰਣਾ, ਧਿਆਨ, ਸਮਾਧੀ) ‘ਨੇੜਤਾ’ ਨਾਮ ਨਾਲ ਮਸ਼ਹੂਰ ਹਨ।
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अष्टांगयोग क्या है
अष्टांग योग महर्षि पतंजलि के अनुसार चित्तवृत्ति के निरोध का नाम योग है (योगश्चितवृत्तिनिरोध:)। इसकी स्थिति और सिद्धि के निमित्त कतिपय उपाय आवश्यक होते हैं जिन्हें 'अंग' कहते हैं और जो संख्या में आठ माने जाते हैं।
अष्टांग योग के अंतर्गत प्रथम पांच अंग (यम, नियम, आसन, प्राणायाम तथा प्रत्याहार)
- यम,
- नियम,
- आसन,
- प्राणायाम तथा
- प्रत्याहार
'बहिरंग' और
शेष तीन अंग (धारणा, ध्यान, समाधि) 'अंतरंग' नाम से प्रसिद्ध हैं।
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মৃগী রোগের জন্য যোগব্যায়াম
সংজ্ঞা: মস্তিষ্কের অস্বাভাবিক বৈদ্যুতিক ক্রিয়াকলাপের সাথে সংবেদনশীল গোলযোগ, চেতনা হ্রাস, বা খিঁচুনির হঠাৎ এবং পুনরাবৃত্ত পর্বগুলির দ্বারা চিহ্নিত একটি স্নায়বিক ব্যাধি।
সমস্যা: ভারতে প্রায় ১০ মিলিয়ন মানুষ মৃগী রোগে ভুগছেন এবং এটি বিশ্বব্যাপী of ষ্ঠ অংশকে আক্রান্ত করে। সক্রিয় মৃগী রোগে আক্রান্ত অনেক ব্যক্তিকে পর্যাপ্ত পরিমাণে চিকিত্সা করা হয় না, যার ফলে চিকিত্সার একটি বড় ব্যবধান ঘটে।
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