बैठ कर करने वाले आसन
हनुमानासन
हनुमानासन को मंकी पोज (Monkey pose) भी कहते हैं। इस योग मुद्रा में बजरंगबली की मुद्रा में शरीर को मोड़ा जाता है। इस आसन की प्रारंभिक मुद्रा थोड़ी चुनौतीपूर्ण होती है क्योंकि इसमें शरीर को लचीला भी करना होता है। यह आसन जमीन पर आराम से बैठकर किया जाता है और लगातार सांस लेने और छोड़ने का भी अभ्यास किया जाता है। महिलाओं के लिए यह आसन बेहद लाभकारी होता है।
यूं करें हनुमानासन
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तोलांगुलासन
तोलांगुलासन करने की आसन विधि :
सर्वप्रथम दण्डासन में बैठ जाएं। फिर शरीर के भार को नितंबों पर संतुलित करते हुए श्वास अन्दर लें। अब थोड़ा-सा पीछे झुकते हुए हाथ-पैरों को भूमि पर से धीरे-धीरे ऊपर उठा दें। कुछ देर रुकने के बाद पुन: दण्डासन में लौट आएं।
तोलांगुलासन करने की दूसरी विधि :
सर्वप्रथम दण्डासन में बैठ जाएं। अब शरीर के भार को हाथों पर संतुलित करते हुए श्वास अन्दर लेते हुए नितंब सहित पूरे पैरों को भूमि पर से ऊपर उठा लें और कुछ देर इसी अवस्था में संतुलन बनाकर रखें।
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મત્સ્યેન્દ્રાસન
નાથ સંપ્રદાયમાં થઈ ગયેલા સમર્થ યોગી શ્રી મત્સ્યેન્દ્રનાથજીએ આ આસન સિદ્ધ કરી એનો પ્રચાર કર્યો હોવાથી એમના નામ પરથી આ આસન મત્સ્યેન્દ્રાસન તરીકે પ્રસિદ્ધ થયું છે. ઘેરંડ સંહિતમાં મત્સ્યેનદ્રાસન વિશે નીચે પ્રમાણે ઉલ્લેખ કરવામાં આવ્યો છે.
अथ मत्स्येन्द्रासनम् ।
उदरं पश्चिमाभासं कृत्वा तिष्ठति यत्नतः ।
नम्राङ्गं वामपादं हि दक्षजानूपरि न्यसेत् ॥२२॥
तत्र याम्यं कूर्परञ्च याम्यकरे च वक्त्रकम् ।
भ्रुवोर्मध्ये गता दृष्टिः पीठं मात्स्येन्द्रमुच्यते ॥२३॥
હઠયોગ પ્રદીપિકામાં મત્સ્યેન્દ્રાસન વિશે નીચે પ્રમાણે ઉલ્લેખ જોવા મળે છે.
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मत्स्येन्द्रासन
मत्स्येन्द्रासन की रचना गोरखनाथ के गुरु स्वामी मत्स्येन्द्रनाथ ने की थी।
विधि-सर्वप्रथम बैठने की स्थिति में आइए अब दायें पैर को घुटने से मोड़कर एड़ी गुदाद्वार के नीचे ले जाइए ।
बायें पैर के पंजे को दायें पैर के घुटने के पास बाहर की तरफ रखिए ।
अब दायें हाथ को बायें घुटने के बाहर से लाइए और बायें पैर के अंगूठे को पकडिए।
अब बायें हाथ को पीठ के पीछे से ले जाकर दायें जाँघ पर रखिए गर्दन को बायें और मोड़कर पीछे देखिए।
कुछ देर इसी स्थिति को रोकिए धीरे से वापिस आइए।
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লোলাসন
লোলাসন : যোগশাস্ত্রে বর্ণিত আসন বিশেষ। লোল শব্দের অনেক অর্থের ভিতর একটি অর্থ হলো- চালিত। হাতের উপর ভর করে শরীর দোলায়িত করার ভঙ্গিমা থেকে এর নামকরণ করা হয়েছে লোলাসন (লোল + আসন)।
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લોલાસન
સંસ્કૃત શબ્દ દોલ એટલે ઝૂલવું અથવા લોલકની માફક લટકવું. એટલે આ આસનને સ્વિંગિગ પોઝ-ઝૂલાસન કે પેન્ડ્યુલમ પોઝ કહે છે.
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उत्थित-पद्मासन(लोलासन)
लोलासन करने के लिए सबसे पहले पद्मासन में आइए फिर हथेलियों को जांघों के बराबर में ज़मीन पर रखिए। हाथों पर पूरे शरीर का वजन लेते हुए साधते हुए ज़मीन से अपने को ऊपर उठा लीजिए,कुछ देर इस स्थिति को बनाए रखिए, कुछ दिन अभ्यास के बाद आप इसमे अपने को आगे पीछे झुला भी सकते हैं। 2-4 बार दोराह सकते हैं। साँस- शरीर को ऊपर उठाते समय साँस भरेंगे, नीचे लाते समय साँस निकाल देंगे। एकाग्रता साँसों पर बनाए रखेंगे। लोलसन से हाथों, कलाइयों और कंधों की मासपेशियों को मजबूत करता है। आँतों की कमज़ोरी, कव्ज में भी लाभदायक है।
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মুক্তাসন
মুক্তাসন : যোগশাস্ত্রে বর্ণিত আসন বিশেষ।
পদ্ধতি
১. প্রথমে দুই পা প্রসারিত করে হাঁটু মুড়ে বসুন এই সময় দুই পায়ের মধ্যে আপনার নিতম্ব ভূমি স্পর্শ করে থাকবে
২. শ্বাস গ্রহণ করতে করতে, আপনার শরীরের দুই পাশে দুই হাত আনুভূমিকভাবে প্রসারিত করুন।
৩. শ্বাস ত্যাগ করুন এবার শ্বাস গ্রহণ করতে করতে দুই হাতের আঙুলগুলো নাকের দুই পাশে প্রসারিত করুন এক্ষেত্রে উভয় হাতের আঙুলগুলো দ্বারা যোনি মুদ্রা তৈরি হবে এবং উক্ত মুদ্রার ভিতরে আপনার মুখমণ্ডল ধারণ করতে হবে।
৪. ২০ সেকেণ্ড এই অবস্থায় স্থির থাকুন এই সময় যোনিমুদ্রার নিয়মে শ্বাস-প্রশ্বাস চালাতে হবে।
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Muktasana
Muktasana is a sitting meditative yoga posture. Its name comes from the Sanskrit, mukti, meaning "liberation," and asana, meaning "posture." As such, it is also known as free pose, meditation pose or liberation pose in English.
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मुक्तासन
पयुमुले वांगुल्फम दक्ष गुल्फम तथोपरि ।
संकेशिरोग्रीवम मुक्तासन तू सिद्धिदम ।।
यानि बाएं पांव की एडी को पायुमूल में लगा कर उस पर दायें पांव की एड़ी को रखें सिर तथा ग्रीवा को समान रख कर,शरीर को सीधा रखते हुए बैठें।यही मुक्तासन है।
मुक्तासन का अभ्यासः बहुत सरल है।इस आसन में सभी लोग बैठ सकते हैं।इसका दूसरा नाम सुखासन भी है।इस आसान में बैठने से शरीर का सारा भाग नितम्बों और फर्श के बीच छोटे से संपर्क भाग में आ जाता है।इस आसान में लंबे समय तक बैठने से आपके नितम्बों में दर्द हो सकता है।सावधानी के लिए नितंबो के नीचे तकिया रखा जा सकता है।
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