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योग

ਅੰਡਕੋਸ਼ ਦੇ ਵਾਧੇ ਲਈ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਲਾਭ: ਗੋਮੁਖਾਸਨ

ਗੋਮੁਖਾਸਣ ਆਸਣ ਵਿਚ, ਇਕ ਵਿਅਕਤੀ ਦੀ ਸ਼ਕਲ ਇਕ ਗ cow ਦੇ ਚਿਹਰੇ ਵਰਗੀ ਬਣ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਇਸੇ ਲਈ ਇਸ ਨੂੰ ਗੋਮੁਖਾਸਨ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ. ਇਹ ਆਸਣ ਅਧਿਆਤਮਿਕ ਤੌਰ 'ਤੇ ਵਧੇਰੇ ਮਹੱਤਵ ਰੱਖਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਆਸਣ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਸਿਹਤ ਅਤੇ ਭਜਨ, ਯਾਦ ਆਦਿ ਵਿਚ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ. ਇਹ ਆਸਣ ਕਮਰ ਦਰਦ, ਗੱਠਿਆਂ, ਮੋ shoulderੇ ਦੇ ਝਟਕਿਆਂ, ਬਦਹਜ਼ਮੀ ਅਤੇ ਅੰਤੜੀਆਂ ਦੀਆਂ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਨੂੰ ਦੂਰ ਕਰਦਾ ਹੈ.

ਇਹ ਅੰਡਕੋਸ਼ ਨਾਲ ਜੁੜੀਆਂ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਨੂੰ ਠੀਕ ਕਰਦਾ ਹੈ. ਇਹ ਆਸਣ ਉਨ੍ਹਾਂ toਰਤਾਂ ਨੂੰ ਦਿੱਤਾ ਜਾਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਛਾਤੀ ਛੋਟੇ ਅਤੇ ਕਿਸੇ ਕਾਰਨ ਕਰਕੇ ਪੱਕੇ ਰਹੇ ਹਨ. ਇਹ ਆਸਣ womenਰਤਾਂ ਦੀ ਖੂਬਸੂਰਤੀ ਨੂੰ ਵਧਾਉਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਕੋਹੜ ਵਿਚ ਵੀ ਲਾਭਕਾਰੀ ਹੈ.

ਗੋਮੁਖਾਸਨ ਦੀ ਵਿਧੀ

अंडकोष वृधि के लिए विशेष लाभदायक::गोमुखासन

गोमुखासन आसन में व्यक्ति की आकृति गाय के मुख के समान बन जाती है इसीलिए इसे गोमुखासन कहते हैं। यह आसन आध्‍यात्मिक रूप से अधिक महत्‍व रखता है तथा इस आसन का प्रयोग स्‍वाध्‍याय एवं भजन, स्‍मरण आदि में किया जाता है। यह आसन पीठ दर्द, वात रोग, कंधे के कडे़ंपन, अपच तथा आंतों की बीमारियों को दूर करता है।

यह अंडकोष से संबन्धित रोगों को दूर करता है। यह आसन उन महिलाओं को अवश्‍य करना चाहिये, जिनके स्‍तन किसी कारण से छोटे तथा अविकसित रह गए हों। यह आसन स्‍त्रियों की सौंदर्यता को बढ़ाता है और यह प्रदर रोग में भी लाभकारी है।

गोमुखासन की विधि-

ਜੇ ਤੁਸੀਂ ਫਲੈਟ ਪੇਟ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ, ਤਾਂ ਇਹ ਯੋਗਾ ਕਰੋ

ਤੰਦਰੁਸਤ ਅਤੇ ਪਤਲੇ ਬਣਨ ਦੇ ਸੰਘਰਸ਼ ਵਿਚ, ਅਸੀਂ ਹਰ ਰੋਜ਼ ਕੁਝ ਨਵਾਂ ਸੋਚਦੇ ਅਤੇ ਕਰਦੇ ਹਾਂ, ਪਰ ਕੁਝ ਦਿਨਾਂ ਵਿਚ, ਇਹ ਸੋਚ ਕੇ ਛੱਡ ਦਿਓ ਕਿ ਕੋਈ ਲਾਭ ਨਹੀਂ. ਇਸ ਲਈ ਹੁਣ ਤੁਹਾਡੀ ਚਿੰਤਾ ਖਤਮ ਹੋਣ ਵਾਲੀ ਹੈ.

ਇਸ ਯੋਗਾ ਨੂੰ ਕਰਨ ਨਾਲ, ਤੁਸੀਂ ਫਲੈਟ ਪੇਟ ਪਾਓਗੇ ਅਤੇ ਤੁਹਾਡਾ ਭਾਰ ਇਕ ਸੌ ਸਦੀ ਘੱਟ ਹੋਵੇਗਾ. ਇਸ ਅਸਾਨ ਯੋਗਾ ਨੂੰ ਕਰਨ ਵੇਲੇ ਕੁਝ ਸਾਵਧਾਨ ਹੋਣ ਦੀ ਜ਼ਰੂਰਤ ਹੈ ਅਤੇ ਯੋਗ yogaੰਗ ਨਾਲ ਕਰਨਾ ਲਾਭਦਾਇਕ ਹੈ.

ਇਸ ਯੋਗਾ ਦਾ ਨਾਮ ਨੌਕਾ ਆਸਣ ਹੈ ਜੋ ਕਰਨਾ ਆਸਾਨ ਹੈ ਅਤੇ ਤੁਹਾਡੇ ਪੇਟ ਅਤੇ ਪੱਟਾਂ ਦੀ ਚਰਬੀ ਨੂੰ ਤੇਜ਼ੀ ਨਾਲ ਘਟਾਉਣ ਵਿੱਚ ਮਦਦ ਕਰਦਾ ਹੈ. ਨੌਕਾ ਆਸਣ ਕਰਨ ਦੇ ਕੁਝ ਆਸਾਨ ਸੁਝਾਅ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਮਦਦ ਨਾਲ ਤੁਸੀਂ ਇਸ ਆਸਣ ਨੂੰ ਸਹੀ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਕਰਨ ਦੇ ਯੋਗ ਹੋਵੋਗੇ.

अगर फ्लैट टमी चाहिए तो करे ये योग

फिट और स्लिम बनने की जद्दोजहद में हम हर दिन कुछ नया करने की सोचते हैं और करते भी है लेकिन कुछ दिनों में ये सोचकर छोड़ देते हैं कि कोई फायदा नहीं हो रहा है। तो अब आपकी चिंता खत्म होने वाली है। 

इस योग को करने से आपको मिलेगी फ्लैट टमी और आपका वजन होगा सौ फी सदी कम। इस आसान योग को करते वक्त थोड़ी सावधानी बरतने की आवश्यकता है और सही तरीके से किया गया योग लाभप्रद होता है।

इस योग का नाम है नौका आसन जो कि करने में आसान है और आपके पेट और जांघों की चर्बी को तेजी से कम करने में मदद करता है। नौका आसन को करने के कुछ आसान टिप्स जिनकी मदद से आप इस आसन को सही तरह से कर पाएंगे।

पॉजीटिव सोच के लिए कपालभाति योग करें

एकांत में और आराम की स्थिति में किया जाने वाला योग है कपालभाती। इसे किसी भी उम्र के लोग कर सकते हैं। 

लाभ

डायबिटीज, जोड़ों का दर्द, आर्थराइटिस, सांस व पेट संबंधी रोग, कब्ज, मोटापा व तनाव जैसी बीमारियों को दूर करने के साथ ही सकारात्मक सोच विकसित होती है। दिल के रोगियों को धीमी गति से इस योग को करना चाहिए। 

कब करें 

मन और भावनाओं पर योग

जीवन में सकारात्मक विचारों का होना बहुत आवश्यक है. निराशात्मक विचार असफलता की ओर ले जाता है. योग से मन में सकारात्मक उर्जा का संचार होता है. योग से आत्मिक बल प्राप्त होता है और मन से चिंता, विरोधाभास एवं निराशा की भावना दूर हो जाती है. मन को आत्मिक शांति एवं आराम मिलता है जिससे मन में प्रसन्नता एवं उत्साह का संचार होता है. इसका सीधा असर व्यक्तित्व एवं सेहत पर होता है.

शरीर की शक्ति का ध्यान में उपयोग

शरीर को इतना शिथिल छोड़ देना है कि ऐसा लगने लगे कि वह दूर ही पड़ा रह गया है, हमारा उससे कुछ लेना-देना नहीं है। शरीर से सारी ताकत को भीतर खींच लेना है। हमने शरीर में ताकत डाली हुई है। जितनी ताकत हम शरीर में डालते हैं, उतनी पड़ती है; जितनी हम खींच लेते हैं, उतनी खिंच जाती है।

 

पढ़ाई का सही वक्त

पढ़ाई के लिए रूटीन जब भी बनाए तो सुबह का समय को ज़्यादा महत्व दे. सुबह का वक्त सबसे अच्छा है पढ़ने के लिए। इस समय माइंड पूरा फ्रेश रहता हैं और ग्रॅसपिंग पावर ज़्यादा होती हैं। दिन का 5 घंटा और सुबह का 1 घंटा बराबर हैं।

ध्यान

 ध्यान महर्षि महर्षि पतंजलि अष्टांग योग साधना पद्धति का सप्तम मंगल योग दर्शन का उद्देश्य आत्म साक्षात करना यह समाधि की प्राप्ति करना है ध्यान समाधि से पूर्व की अवस्था है जब ध्यान अमृत रूप से प्रभावित होता रहता है तो यह समाधि का सादर करा देता है अष्टांग योग के दो भाग बजरंग कथा अंतरंग योग है बहिरंग योग में यम यम नियम आसन प्राणायाम प्रत्याहार आते हैं जबकि अंतरंग योग साधना में धारणा ध्यान तथा समाधि आते हैं दाना में अपने इस चंचल मन को किसी एक स्थान पर केंद्रित किया जाता है जब किसी स्थान विशेष पर हमारा मन नियंत्रण केंद्रित रहने लगता है तब वह धारणा ध्यान में परिवर्तित होने लगती है महर्षि पतंजलि ध्